Monday, June 16, 2014

"एक चिड़िया सुबहा सुबहा मेरे आँगन मे आई,
चहेकती, थिरकति वो एक डाली से दूसरी डाली
पर मंडराती,
कभी दाना चुगति, कभी पानी पीती,
कुछ धूप समेटती ओर कुछ छाँव ओढती,
फिर एक तिनका लेकर वो उड़ गई,
जेसे सबक जीनेका वो दे गई..
एक चिड़िया सुबहा सुबहा मेरे आँगन मे आई..."

No comments:

Post a Comment