प्यास भी पीने को तरस जाए,
बनके बूंदे जो तू बरस जाए,
मत कर सितम इन अदाओसे,
आह भर भर के कही मर न जाए,
आँखो की शरारत मे हे तूफान कई,
देख लो इधर तो फ़ना हम हो जाए,
बस करो अब पिलाना शराब-ए-हुस्न,
बेखुदी मे कही हम बहेक न जाए,
बनके बूंदे जो तू बरस जाए,
मत कर सितम इन अदाओसे,
आह भर भर के कही मर न जाए,
आँखो की शरारत मे हे तूफान कई,
देख लो इधर तो फ़ना हम हो जाए,
बस करो अब पिलाना शराब-ए-हुस्न,
बेखुदी मे कही हम बहेक न जाए,
'विरल'
