Wednesday, June 26, 2013

मदहोशी

प्यास भी  पीने को  तरस जाए,
बनके  बूंदे जो तू  बरस जाए,

मत  कर  सितम इन अदाओसे,
आह भर भर के कही मर न जाए,

आँखो की शरारत मे हे तूफान कई,
देख लो इधर तो फ़ना हम हो जाए,

बस करो अब 
पिलाना शराब-ए-हुस्न,
बेखुदी  मे कही हम  बहेक न जाए,

'विरल'

Friday, June 21, 2013

बारिश की शाम



बारिश की शाम और
ये तन्हाई...
बरसती ये बूंदे..
याद बनकर हे आई.

वो पहेली बारिश,

वो हसी शाम,
वो भीगे होटो की नमी,
वो बाँहोकी धूप,

वो पलको की छाँव,
वो तेज धड़कनो की सदा,
वो गर्म सांसो की ठंडक,
वो आँखो की शरारत...
जाने यादे ये कितनी लाई..

बारिश की शाम,
और ये तन्हाई..
बरसती बूँदो ने..
आंग केसी ये लगाई,

वो अनकहे जज़्बात, वो
हसीन से ख्वाब....
वो उम्मिदो का जहाँ,
वो वादो का सिलसिला,
फिर इक दिन.....
ख्वाबो का टूटना....
ख्वाइशो का बिखरना...
और फिर तन्हाई...

बारिश की शाम,
मौसम हे कितने लाई,
बरसती बूँदोने फिर
नज़्म ये लिखाई..

Sunday, June 9, 2013

Aarazu..!!

कुछ दबी सी आरज़ुओ को जगाते हे,
कुछ बिखरे से ख्वाबो को सजाते हे,

एक कदम मे बढ़ाऊ एक तुम,
मिलकर कांरवाँ नया बनाते हे,

न रहे शिकवा न रहे शिकायते,
आओ जहाँ एक एसा बनाते हे,

चलो प्यार ही प्यार भर दे इस जहाँ मे,
फर्ज़ इंसानियत का अब निभाते हे..

"विरल"