सूरजकी पहेली किरनोसे नहाई हुई ये सुबह,
रात की ज़ुल्फो को अपने हसीन चहेरे से हटाती ये सुबह,
पंछीओ की चहेक ती सरगम पे थिरकती ये सुबह,
थोड़ी गर्म थोड़ी सर्द सांसो से मेरी रुह मे समाती ये सुबह,
अंगड़ाई लेती मस्ती से मेरी बाँहो मे यूँ लिपट जाती ये सुबह,
साथ पल दो पल का रोज निभा जाती हे ये सुबह,
रात की ज़ुल्फो को अपने हसीन चहेरे से हटाती ये सुबह,
पंछीओ की चहेक ती सरगम पे थिरकती ये सुबह,
थोड़ी गर्म थोड़ी सर्द सांसो से मेरी रुह मे समाती ये सुबह,
अंगड़ाई लेती मस्ती से मेरी बाँहो मे यूँ लिपट जाती ये सुबह,
साथ पल दो पल का रोज निभा जाती हे ये सुबह,
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