वाचा
Sunday, December 25, 2011
Pyar ka Melaa..;-)
प्यार के एक लम्हे के तलबगार थे हम
वक़्त इतना दे जाओगे ये सोचा न था,
खुशी के चार पल ही काफ़ी थे दोस्त,
मौसम बहारोका दे जाओगे ये सोचा न था.
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