ख्वाबो और ख्वाइशो के साथ मे बड़ा हुआ,
कारवाँ मुसीबतो का भी साथ आ खड़ा हुआ,
थी चाहत मुज मे भी कुछ कर गुजरने की,
दिल मे था जोश, जुनून सर पर चढ़ा हुआ,
आ कर थाम लेता गर कोई हाथ मेरा भी
देर तक था मे वहा, आवाज़ देता हुआ,
रोशनी कभी तो आएगी इस खुली खिड़की से,
फिरता रहा मे अंधेरोमे गिरता संभलता हुआ,
"विरल"
कारवाँ मुसीबतो का भी साथ आ खड़ा हुआ,
थी चाहत मुज मे भी कुछ कर गुजरने की,
दिल मे था जोश, जुनून सर पर चढ़ा हुआ,
आ कर थाम लेता गर कोई हाथ मेरा भी
देर तक था मे वहा, आवाज़ देता हुआ,
रोशनी कभी तो आएगी इस खुली खिड़की से,
फिरता रहा मे अंधेरोमे गिरता संभलता हुआ,
"विरल"
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