ये तन्हाई...
बरसती ये बूंदे..
याद बनकर हे आई.
वो पहेली बारिश,
वो हसी शाम,
वो भीगे होटो की नमी,
वो बाँहोकी धूप,
वो पलको की छाँव,
वो तेज धड़कनो की सदा,
वो गर्म सांसो की ठंडक,
वो आँखो की शरारत...
जाने यादे ये कितनी लाई..
बारिश की शाम,
और ये तन्हाई..
बरसती बूँदो ने..
आंग केसी ये लगाई,
वो अनकहे जज़्बात, वो
हसीन से ख्वाब....
वो उम्मिदो का जहाँ,
वो वादो का सिलसिला,
फिर इक दिन.....
ख्वाबो का टूटना....
ख्वाइशो का बिखरना...
और फिर तन्हाई...
बारिश की शाम,
मौसम हे कितने लाई,
बरसती बूँदोने फिर
नज़्म ये लिखाई..
No comments:
Post a Comment