Saturday, September 15, 2012

Musafir

कहा जा रहा हू मे,
किस ओर मेरा मुकाम.
करू क्यूँ मे ये फिकर,
बस चलना  मेरा काम.


थोड़ी सी ज़मीन
थोड़ा सा आसमाँ,
ख्वाबो का सफ़र हो
सितारो का रासता,
ले लू खुशिया थोड़ी,
थोड़ी सी हसी साथ.

कहा जा रहा हू मे,
किस ओर मेरा मुकाम.
करू क्यूँ मे ये फिकर,
बस चलना  मेरा काम.
 



चल तू भी साथ मेरे,
बाँटेंगे मिलकर सब,
बिखरे सपनो को जोड़,
बनाएँगे फिर एक आशियाँ,
चल चले उस शहर,
जहा प्यार का हो जहाँ.

कहा जा रहा हू मे,
किस ओर मेरा मुकाम.
करू क्यूँ मे ये फिकर,
बस चलना  मेरा काम.

 
ना हे बहोत सी चाहते,
ओर ना ही हे रंजिशे,
एक छोटा सा दिल हे
ओर कुछ धड़कती ख्वाईशे.
मज़ा तो सफ़र का होता हे,
मंज़िल का तो सिर्फ़ हे नाम.

कहा जा रहा हू मे,
किस ओर मेरा मुकाम.
करू क्यूँ मे ये फिकर,
बस चलना  मेरा काम.


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