यूँ तुम जो मुस्कुरा जाते हो,
उल्जन इस दिल की बढ़ा जाते हो,
कभी पल मे बेगाना बनाते हो,
तो कभी सिने से लगा जाते हो,
प्याससे मर रहे थे हम, तभी,
आके बूँद पानी पीला जाते हो,
उल्जन इस दिल की बढ़ा जाते हो,
कभी पल मे बेगाना बनाते हो,
तो कभी सिने से लगा जाते हो,
प्याससे मर रहे थे हम, तभी,
आके बूँद पानी पीला जाते हो,
"विरल"
दिल की बेताबीओ को सुकुन मिल जाए,
भटकती ख्वाइसो को पनाह मिल जाए,
तू आके लगाले ज़रा गले से मूज़े,
मौत से पहेले थोड़ी जिंदगी मिल जाए.
"विरल"
तेरी खामोशी का मे क्या सबब लू?
उसे मोहब्बत समज़ू या,
तुज़से मूह मोड़ लू??
"विरल"
No comments:
Post a Comment