जलती हे तो जल जाए दुनिया यहाँ किसीकी,
फर्क अब कहा किसीको कुछ पड़ता हे।
पथ्थरसा हो गया हे दिल यहाँ हर इंसान का,
प्यार महोब्बतोंसे कहा अब ये धड़कता हे ?
जुठ और फरेबी का दौर चला हे चारो और।
कितना भी कहो, सच कहाँ कोई सुनता हे।
की इस कदर फैला हे आलम नफरत का 'राही'
हर हाथ से यहाँ, खून किसीका टपकता हे।
शायरी
हर शख्स यहाँ अपनी ही मस्ती में खोया हे,
ईमान बिका हे, जमीर उसका सोया हे।
मायूसी, लाचारी, बेबसी हर चहेरे पर यहाँ,
फसल वही पायी हे जो उसने बोया हे।
शायरी
हर शख्स यहाँ अपनी ही मस्ती में खोया हे,
ईमान बिका हे, जमीर उसका सोया हे।
मायूसी, लाचारी, बेबसी हर चहेरे पर यहाँ,
फसल वही पायी हे जो उसने बोया हे।
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