Wednesday, August 8, 2012

चाहता हु...!

आज मे खुदसे रूबरू होना चाहता हू,
मे अब बस "मे"  होना चाहता हू,

भूल गया हू मे पहचान खुदकी,
याद मे अब खुदको आना चाहता हू,

मिला लिए हाथ यहा बहोत लोगो से,
मिलाना अब दिल से दिल चाहता हू,

नफ़रतो की ज़ंज़ीरो से होकर जुदा,
प्यार के आसमामे अब उड़ना चाहता हू,

ना रहे शिकवे ना ही कोई रंजिश,
कुछ इस कदर अब जी जाना चाहता हू,

-विरल


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