Wednesday, August 29, 2012

Basic instinct

मदहोश समा, बेखुदी मे आलम  सारा  होगा,
तेज़ धड़कने, सिर्फ़ सांसो का आना जाना होगा,

पानी की बूँदो से सजे गालो पर,
भीगी लटो का यूँ मंडराना..
उंगलिओसे हटा के उनको,
धिरेसे कानोके पीछे सरकाना..
लेके चेहरा इन हाथो मे,
बस यूही उसे देखते रहना..

रुका वक्त, थमा सा जग सारा होगा,
लम्हा वो हर लम्हो मे प्यारा होगा,

ज़ुकाके वो पलके अपनी,
मेरी आगोश मे यूँ समा जाना...
कभी शरमाना,
कभी दामन छुड़ाना..

कुछ नाकाम कोशिशे दोहराना,
फिर सिने से मेरे लग जाना..

कुछ कातिल अदाओ का नज़राना होगा,
हुस्न के जलवो पे 
फिर दिल हारा होगा..

दोनो के बीच सिर्फ़ खामोशी होगी,
धड़कनो से धड़कन..
सांसो से सांस की बाते होगी,
पल पल मे कई राहते होगी,
जिंदगी से
ना कोई ख्वाइशे होगी.

मदहोश समा, बेखुदी मे आलम  सारा  होगा,
तेज़
धड़कने, सिर्फ़ सांसो का आना जाना होगा,


'विरल'

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